इंडिया
यार तुम्हारा हर बार का ऐसा ही है! तुम हमेशा ऐसे ही करती हो! कभी तो आ जाया करो हमारे साथ!
नैना की दोस्त ने उस से कहा। नैना और वो दोनो ही इस वक्त Collage के गेट के बाहर खडे नैना के ड्राइवर का इंतेजार कर रहे थे। नैना ने मुंह बनाते हुए कहा, सना तुम तो जानती हो ना, इस के बावजूद तुम मुझ से ये सब कह रही हो! ऐसा नहीं है कि में आना नहीं चाहती लेकिन मुझे नहीं लगता कि दादू मुझे जाने की परमिशन देंगे, और तुम जानती हो कि में दादू की बात को कभी भी इनकार नहीं करती।
नैना की बात पर सना ने आह भरी और कहा, हां मुझे पता है, लेकिन यार, ये हमारा लास्ट ईयर है! अगर अभी भी तुम ऐसे ही करोगी तो अपनी लाइफ कब एंजॉय करोगी।
नैना ने इस पर सख्त लहजे में कहा, नैना के लिए ये सब मैटर नहीं करता, मुझे किसी भी तरह से आगे बढना है और अपनी लाइफ में कुछ बेहतर करना है, उस के बाद ये सब करने के लिए तो पूरी जिंदगी पडी है।
उस ने इतना कहा ही था कि राजवंश फैमिली की कार उस के सामने आ कर रुकी। उस ने देखा नहीं कि कार कौन ड्राइव कर रहा है। उस ने स्माइल किया और सना को Bye करते हुए कार के बैक सीट का गेट ओपन करके अंदर बैठने लगी, की तभी उस के कानों में एक सख्त आवाज सुनाई दी, में तुम्हारा ड्राइवर नहीं हु कि तुम पीछे जा कर बैठोगी! आगे आओ!
इस आवाज पे वो घबरा कर रह गई। उस ने पलट कर सना की तरफ देखा तो सना भी थोडी सी अजीब दिखाई दे रही थी। वो इस आवाज को पहचान गई और तभी उसे याद आया कि आज डेट क्या थी। उसने अपनी आंखें बंद की और अपना बैग लिए वो फ्रंट Door ओपन करके पैसेंजर सीट पर आ कर बैठ गई। सना ने उसे एक awkward स्माइल किया और कार चलने लगी।
नैना की हिम्मत नहीं हो रही थी कि वो कार ड्राइव कर रहे शक्श को देख भी सके।
सना और नैना बचपन के काफी अच्छे दोस्त थे। नैना के पापा मुंबई के जाने माने बिजनेस मैन थे लेकिन जब नैना महज बारहth में थी तब एक कार एक्सीडेंट में उस के मॉम और डैड दोनों की ही डेथ हो गई थी। और तब से ही नैना सिर्फ अपने दादा जी के साथ रहा करती थी। लेकिन ये सिर्फ तब तक था जब। तक अंश नाम का ये शक्श उन दोनों की लाइफ में नहीं आ गया था। वो नहीं जानती थी कि अंश कौन है कहां से आया है? लेकिन खुद को उस का फिआंसे बताता था। उसे हैरानी तो तब हुई जब दादू ने भी उस की बात को एक्सेप्ट कर लिया।
नैना ने कुछ वक्त तक इस बात पे काफी बहस की, खुद को कमरे में बंद भी कर रखा था लेकिन इस का कोई फायदा नहीं हुआ। ये अंश नाम की मुसीबत उस के गले बाँध दी गई थी।
उस की इन हरकतों की वजह से दादू बीमार पडने लगे। जिस वजह से नैना ने अपनी जिद्द छोड दी और अपनी किस्मत को एक्सेप्ट कर लिया। लेकिन इस का ये मतलब नहीं था कि नैना के दिल में अंश के लिए कुछ था। उस का सख्त मिजाज उसे आज भी पसंद नहीं था। या यूं कह सकते है वो उस से सिर्फ डरती थी। और अंश ने भी कभी उस से प्यार से बात करने की कोशिश नहीं की। लेकिन अंश दिखने में था बहुत हैंडसम।
उस के ब्राऊन Color के बाल और ब्राऊन आंखे काफी Attractive थी। और ऊपर से उस का गोरा रंग किसी को भी अपना कायल बनाने के लिए काफी था। लेकिन नैना ने कभी भी उसे रोमांटिक नजरों से देखा ही नहीं था। उसे कभी अपने लुक्स को लेकर खास फिक्र नहीं रहती थी। लोग कहते थे कि उसकी बडी- बडी आँखें और हल्के गुलाबी होंठ बहुत खूबसूरत हैं, लेकिन उसने कभी इन बातों पर ध्यान नहीं दिया। उसे सादगी में रहना ही ठीक लगता था — बिना ज्यादा मेकअप के, बिना बनावटीपन के।
नैना अब MBA के फाइनल ईयर में थी और पढाई में काफी अच्छी थी। अंश हमेशा आउट ऑफ कंट्री ही रहा करता था। जिस वजह से नैना बेफिक्र रहती थी लेकिन महीने में एक बार वो दादू के मंथली Check अप के वक्त दो तीन दिन के लिए इंडिया आ जाता था और उस के घर में ही रहता था।
महीने के इन दिनों नैना जैसी बडी मुश्किल से दिन गुजरती थी। ऐसा नहीं था कि नैना दादू को Check अप के लिए नहीं ले जा सकती थी लेकिन पता नहीं इस शख्स को शायद उस पे भरोसा नहीं था इस लिए वो खुद ही दादू का Check अप करने के लिए आता था।
दोनों का रास्ता बडी ही चुप्पी के साथ cut रहा था। ना ही अंश ने बात की शुरुआत की थी और ना ही नैना ने। ऐसा ही होता था। कहने को तो वो उसका फिआंसे था लेकिन उन दोनों में ऐसा कुछ भी नहीं था।
कार राजवंश मेंशन के बाहर आ कर रुकी और अनिशा जल्दी से कार से बाहर निकल गई। अंश ने भी कार की कीज को गार्ड को दिया और खुद अपने कोट को सही करते हुए अंदर की तरफ आया।
नैना ने लिविंग हॉल में आते ही सबसे पहले अपने दादू को ढूंढा लेकिन जब उस ने दादू को नहीं देखा तो वो उन के कमरे की तरफ बढने लगी।
उस ने अभी दो तीन स्टेयर्स चढी थी कि उस के कानों में अंश की भारी आवाज सुनाई दी। अपने कपडे पैक कर लो, तुम मेरे साथ चल रही हो।
उस की इस बात पे नैना के कदम ठिठक कर रुक गए और उस ने हैरत में अंश की तरफ देखा। अंश ने उन दोनों के बीच का फासला कम किया और वो नैना के पास आ कर खडा हो गया। नैना को इस तरह से बिना रिस्पॉन्स के खडा देख अंश ने वापस कहा, क्या तुम्हे मेरी बाते सुनाई नहीं देती? मैं ने तुम्हें तैयार होने के लिए कहा!
उस की दुबारा से आवाज सुन कर नैना जैसे होश में आई और उस ने हैरत में पूछा, क्या ये मजाक है?
अंश ने अपनी एक आईब्रो उठाई और उस के और पास आ गया। अपनी आवाज को जितना हो सके उतना कंट्रोल में रखने की कोशिश करते हुए उसने कहा, क्या तुम ने आज तक कभी मुझे मजाक करते हुए देखा है?
हां वो ये बात कैसे भूल सकती थी। आखिर उस के सामने खडा हुआ शख्स मजाक कैसे कर सकता था? लेकिन वो उस पे क्यों हुकुम चला रहा था और आखिर वो उसे कहा ले जाने की बात कर रहा था?
वह चलकर उसके सामने आकर खडी हो गई। अंश ने अपनी आईब्रो सिकुडी और कहा, इस तरह से देखने की जरूरत नहीं है! तुम्हारे दादू ने ही कहा है, एंड में तुम्हे एक बात बताना भूल गया, तुम्हारे दादू इस वक्त घर पर नहीं है वो Hospital में है!
जैसे ही नैना ने दादू के Hospital में होने की बात सुनी वो पिछली सारी बातें भूलकर जल्दी से पूछने लगी, दादू Hospital में है? क्यों? क्या हुआ है उन्हें? और आप इतनी इंपॉर्टेंट बात बताना कैसे भूल सकते है?
इस पर अंश ने बेपरवाही से अपने कंधे उचकाए और कहा, अब इंसान हु ; भूल गया! और इतनी कोई बडी बात भी नहीं थी, वो उन का Hospital में मंथली Check अप हो रहा है!
नैना ने लगभग रोते हुए कहा, ठीक है!
उस के लिए अपने दादू से रिलेटेड कोई भी बात छोटी नहीं थी। और आज अचानक उसके दादू ने ऐसा फैसला क्यों लिया वो समझ नहीं पा रही थी।
वो ऊपर जाने की बजाय बाहर की तरफ जाने लगी, ये देखकर अंश ने उसका हाथ पकडा और उसे आगे जाने से रोकते हुए कहा, कहा जा रही हो?
नैना ने उस के सख्त लहजे को देखते हुए धीरे से कहा, वो में दादू के पास.
उसने इतना ही कहा था कि अंश ने कहा, कोई जरूरत नहीं है! में अभी उन्हें ही लाने जा रहा हु, मेरे आने तक तुम्हारी पैकिंग हो जानी चाहिए, और जो पूछना है दादू के आने के बाद उन से पूछ लेना!
इतना बोलने के बाद उसने नैना के जवाब सुनने की भी जहमत नहीं उठाई और मेंशन से बाहर चला गया। वही इन सब बातों को सोचते हुए नैना अपने नाखून चबाते हुए कमरे में आ गई। उस ने विंडो से देखा कि अंश की गाडी मेंशन से बाहर निकल रही है।
नैना ने जल्दी से अपना बैग बेतरतीब ढंग से कमरे के एक कोने में फेंका और जल्दी से अपनी बेस्ट Friend सना को Call किया। सना के Call रिसीव करते ही नैना ने सारी बातें उसे बता डाली। सना भी परेशान हो गई और उसने कहा, लेकिन वो तुम्हे कहा ले जाना चाहता है? और क्या तुम्हारे दादू इस बात से राजी है?
नैना कमरे में इधर से उधर चक्कर काट रही थी। उसने कहा, में नहीं जानती! लेकिन जिस कॉन्फिडेंस से वो बोल रहे थे मुझे लगता है दादू राजी है! आखिरकार वो मुझे कहा ले जाना चाहते है?
सना ने उसकी बात सुनी और एक आह भरते हुए कहा, अभी परेशान होने से कोई फायदा नहीं है, जब तुम्हारे दादू वापस आ जाए तो तुम शांति से ये सारी बातें उन से पूछो तो बेहतर है। आई एम श्योर की तुम्हारे दादू तुम्हे ले जाने के लिए फोर्स तो नहीं करेंगे!
नैना को भी सना की बात सही लगी। वो अब बस दादू के आने के बेसब्री से इंतजार कर रही थी।
वो ये सब सोचते हुए कमरे में इधर से उधर घूम ही रही थी कि तभी उसे अंश की गाडी के रुकने की आवाज आई। वो जल्दी से अपने कमरे से बाहर आई।
अंश दादू को अपने सहारे हॉल में ले आया था। नैना जल्दी से भाग कर दादू के गले लगी थी। उसे जब ये पता चला था कि दादू Hospital में है वो एक पल के लिए घबरा गई थी। वो भूल ही गई थी कि अंश हर महीने दादू का मंथली Check अप करवाता है।
दादू ने भी हंसते हुए नैना को गले से लगा लिया। थोडी ही देर में नैना ने वो बात पूछ ही ली जिस के वजह से वो इतना नर्वस हो रही थी।
दादू मुझे अंश कह रहे थे कि मुझे उन के साथ कही जाना है? लेकिन कहा? में। आप को छोडकर कही नहीं जा रही!
अंश ने जैसे नैना की बात सुनी ही नहीं और वो सोफे पर आ कर बैठ गया। उसने अपने एक पैर पर दूसरा पैर रखा और बेफिक्र हो कर अपना मोबाइल फोन चलने लगा।
दादू नैना की इस बात पर थोडा सा सीरियस हुए और बोले, हां में चाहता हु कि तुम अंश के साथ चली जाओ! में अगले हफ्ते तीर्थ यात्रा के लिए अपने दोस्तों के साथ निकल जाऊंगा और शायद मुझे लौटने में एक साल लगे। और में तुम्हे इस तरह से अकेले यहां पर नहीं छोड सकता! इसलिए में चाहता हु कि तुम अंश के साथ लन्दन चली जाओ!
नैना दादू की इस बात से हैरत में पड गई थी। उसने एक नजर अंश की तरफ देखा। और जल्दी से घबराकर बोली, दादू में यहां पर अकेली रह सकती हु! आप बेकार में अंश को क्यों प्रॉब्लम में डाल रहे है! और वैसे भी मेरी Collage यही पर है, में यहां से कही नहीं जा सकती!
नैना जानती थी कि दादू इस तीर्थ यात्रा की तैयारी पिछले कुछ महीनों से कर रहे थे और उसे भी इस से कोई प्रॉब्लम नहीं थी। लेकिन अंश के साथ किसी और देश में चले जाना। वो तो पहले से उससे काफी ज्यादा डरती थी।
काफी देर तक नैना और दादू में बीच इस बात को ले कर बहस होती रही। लेकिन अंत में नैना को अपने पैर पीछे खींचने पडे! लेकिन नैना का मुंह बना हुआ था। ये साफ जाहिर था कि वो अंश के साथ नहीं जाना चाहती थी। दादू ने नैना के sir पर हाथ फेरा और कहा, में तो चाहता था कि तुम दोनों की शादी ही कर दी जाए ताकि में तुम्हारी तरफ से बेफिक्र हो जाऊं, लेकिन मुझे पता है कि मेरी बच्ची अभी शादी जैसी बडी जिम्मेदारी को संभाल नहीं सकती!
दादू की ये बात सुनकर नैना के माथे पर बल पड गए। उसने चोर आंखों से अंश की तरफ देखा, उसे देखकर ऐसा लग रहा था जैसे उसके लिए ये कोई बडी बात ना ही। जबकि नैना के तो गले में जैसे कुछ अटक सा गया था।
नैना ने थोडा हिचकिचाते हुए कहा, दादू! क्या ये सब कुछ दिनों बाद नहीं हो सकता? क्या मुझे आज ही जाना जरूरी है? आप को तो अभी जाने में एक हफ्ता है, और मेरे पास तो वीजा भी नहीं है। और मेरे जाने के बाद आप का ख्याल कौन रखेगा?
दादू ने नैना के sir पर हाथ फेरा। वो खुद भी नैना को खुद से जुदा नहीं करना चाहते थे। उन्होंने कहा, तुम किसी बात की फिक्र मत करो! अंश ने ऑलरेडी सब कुछ सेट कर दिया है। मेरा खयाल रखने के लिए यहां पर सर्वेंट्स है। और तुम्हारा वीजा और टिकट दोनों ही पहले से रेडी है। यहां तक कि तुम्हारा Admission प्रोसेस भी Collage में शुरू हो चुका है।
नैना को ये सब सुनकर अंश पर बेहद गुस्सा आ रहा था। आखिर अंश को ये सब करने की क्या ही जरूरत थी? लेकिन अब उसका कोई भी चांस नहीं था बचने का। इसलिए उसने अब दादू के सामने हथियार डाल दिए।
आज शाम को उसकी फ्लाइट थी और उसे जाने से पहले अपने दोस्तों से आखिरी बार मिलना था। इसलिए वो दादू की परमिशन ले कर जाने लगी लेकिन उस की हैरानी का ठिकाना तब नहीं रहा जब अंश भी उसके साथ आने लगा।
उसने हिचकिचाकर कहा, आप कहा आ रहे है? आप फिकर ना करे में ड्राइवर के साथ चली जाऊंगी!
लेकिन अंश की बात सुनकर नैना की आंखे हैरानी से फैल गई। अंश ने नैना का हाथ पकडा और उसे बाहर की तरफ ले जाते हुए कहा, मुझे तुम पर भरोसा नहीं! कही तुम ये बहाना करके भाग ना जाओ!
नैना को उसकी बात पर गुस्सा तो काफी ज्यादा आया था लेकिन उसकी हिम्मत नहीं थी कि वो उसे कुछ कह सके। उसने अपना हाथ अंश के हाथ में महसूस किया तो उसे अजीब नहीं लग रहा था। हालांकि वो ऐसे किसी से भी आसानी से फ्री नहीं होती थी। अंश ने उसे कार में बैठाया और खुद कार ड्राइव करते हुए एक कैफे के बाहर आ गया। नैना आज उसे देखे ही जा रही थी।
कैफे के बाहर जैसे ही कार रुकी नैना का ध्यान टूटा। वो कार से बाहर निकली और सामने के कैफे की तरफ देखा। जब उसने ये देखा कि दूसरी तरफ से अंश भी बाहर आ गया। उसे लगा था कि अंश उसे ड्रॉप करके चला जाएगा या फिर कार में ही वेट करेगा। लेकिन ये उसके दोस्तों से मिलने के लिए क्यों आ रहा था? वो उस के प्रेजेंस हिचकिचा कर ही रह जाएगी।
यही सोचते हुए उसने अंश को टोका, अंश आप मेरे साथ नहीं आ सकते! मेरे Friend आप के होने की वजह से अनकंफर्टेबल फील करेंगे!
नैना ने अपने Friend का नाम ले लिया। असल में तो वो खुद हो रही थीं। लेकिन अंश को जैसे उस की बात से कोई फर्क ही नहीं पडता था। वो अंदर की तरफ आ गया।
नैना मन ही मन में उसे कोसते हुए कैफे में आ गई। ये कैफे काफी बडा था और Collage के कई सारे लडके लडकियां वहां पर बैठे मस्ती कर रहे थे, खा रहे थे और कुछ कप्लस भी बैठे हुए थे।
अंश वहां के एक चेयर पर जा कर अकेला बैठा गया जहां से वो नैना को देख सकता था।
वही नैना ने ये देखकर राहत की सांस ली। और जल्दी से अपने दोस्तों के पास चली गई।
अंश ने अपने लिए कॉफी ऑर्डर की और मोबाइल फोन में कुछ करने लगा। इधर नैना ने आते ही अपने दोस्तों को गले लगाया और सब को अपने जाने के बारे में बताया। नैना का जाने की बात सुनकर सभी हैरान थे। नैना ने उन लोगों को समझाते हुए कहा, अरे ; तुम लोग बेकर में इतना परेशान हो रहे हो! वैसे भी में वहां पर वीजा ले कर जा रही हु हमेशा के लिए बसने के लिए नहीं! दादू के वापस आते ही में भी वापस आ जाऊंगी! वैसे भी मुझे यहां पर अभी मेरे डैड का बिजनस संभालना है!
नैना अपनी बातों से सभी को जितना हो सकते उतना उदास ना होने दे रही थी, लेकिन खुद के मन का क्या करती? नैना के सामने ही बैठे उसके दोस्त राहुल ने नैना की आंखों में देखते हुए सीरियस टोन में कहा, तुम्हे वापस आना होगा, अगर तुम नहीं आई तो में वहां पर आ जाऊंगा और तुम्हे ले आऊंगा! तुम नहीं जानती कि में तुम्हे कब से ये बताना चाहता था लेकिन एक्चुअली नैना आई Love You! में तुम्हे पहले दिन से ही पसंद करता हु! लेकिन कभी बताने की हिम्मत नहीं कर पाया। और अब जब तुम जा रही हो तो में अपने आप को रोक नहीं पा रहा! आई Love You सो मच नैना! आई वांट टू मैरी You! विल You बी माइन!
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